Mangala Gauri Vrat 2025: 14 या 15 जुलाई कब रखें मंगला गौरी व्रत? जानिए सही तिथि और पूजा मुहूर्त

Dehradun,Rekha Chitkaria। : सावन का पवित्र महीना 11 जुलाई 2025 से शुरू हो रहा है, जो कि भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस पूरे महीने में जहां सोमवार को शिवजी की विशेष पूजा और व्रत का महत्व होता है, वहीं मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखने की परंपरा है। यह व्रत विशेष रूप से स्त्रियों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। विवाहित महिलाएं अपने परिवार की सुख-शांति, पति की लंबी उम्र और समृद्ध जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं उत्तम जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना से यह उपवास करती हैं।

शास्त्रों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए जिन व्रतों का पालन किया था, उनमें मंगला गौरी व्रत भी शामिल है। यह व्रत सावन के प्रत्येक मंगलवार को श्रद्धा और विधिपूर्वक रखा जाता है। इस बार सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 15 जुलाई 2025 को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं माँ गौरी की विशेष पूजा करती हैं, व्रत कथा सुनती हैं और सुहाग की वस्तुएँ अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। ऐसा माना जाता है कि यह व्रत नारी जीवन को सौभाग्य, संतोष और स्थायित्व प्रदान करता है।

मंगला गौरी व्रत 2025 कब शुरू होगा? 
पहला मंगला गौरी व्रत– 15 जुलाई 2025 
दूसरा मंगला गौरी व्रत – 22 जुलाई 2025 
तीसरा मंगला गौरी व्रत–29 जुलाई 2025
चौथा मंगला गौरी व्रत – 05 अगस्त 2025

मंगला गौरी शुभ मुहूर्त
इस वर्ष सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 15 जुलाई 2025 (मंगलवार) को रखा जाएगा। इस दिन अभिजीत मुहूर्त, जो कि पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है, उपलब्ध रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11:59 से  दोपहर 12:55 तक
इस शुभ समय में माता गौरी की पूजा, व्रत का संकल्प, कथा श्रवण और दान आदि करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। यदि महिलाएं इस मुहूर्त में व्रत की पूजा संपन्न करें तो उन्हें अखंड सौभाग्य और पारिवारिक सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

मंगला गौरी व्रत मंत्र
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।। इसके अलावा आप ऊं उमामहेश्वराय नम: मंत्र का जप भी कर सकते हैं।

मंगला गौरी व्रत का महत्व
मंगला गौरी व्रत को करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही पति को लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अविवाहित कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। वहीं अगर कोई संतान प्राप्ति की इच्छा से भी इस व्रत को रखता है को उनको संतान प्राप्ति के योग बनते हैं। वहीं जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष है, वो लोग भी मंगला गौरी व्रत रख सकते हैं। ऐसा करने से मंगल का दोष का प्रभाव कम होता है।

यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए उत्तराखंड खुलासा न्यूज उत्तरदायी नहीं है।

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